राहुल गांधी के दौरे से राजस्थान कांग्रेस में और बढ़ी खेमेबाजी….

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राजस्थान :जयपुर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की राजस्थान यात्रा के बाद प्रदेश के कांग्रेस नेताओं में खेमेबाजी खत्म होने के बजाय बढ़ी है। राहुल गांधी के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच दूरी साफ नजर आई। दो दिन चार जिलों में हुई चार सभाओं में गहलोत और पायलट साथ रहे, लेकिन दोनों दूर-दूर ही नजर आए। इस बार राहुल गांधी के दौरे की पूरी कमान गहलोत के हाथ में थी।उन्होंने पायलट को राहुल गांधी से दूर रखने का पूरा प्रयास किया। चार में से दो सभाओं में तो पायलट को बोलने का मौका तक नहीं दिया गया। पायलट के पुराने संसदीय क्षेत्र रूपनगढ़ में हुई सभा में तो कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अजय माकन ने उन्हे मंच से नीचे तक उतार दिया। हालांकि इसका काफी विरोध हुआ। सभा में आए लोगों ने जमकर नारेबाजी की। नारेबाजी कर रहे लोगों को शांत कराने के लिए माकन, प्रदेश के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा सहित कई मंत्री मैदान में इधर-उधर दौड़ते नजर आए, लेकिन भीड़ शांत नहीं हुई।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल गांधी के पीछे खड़े होकर लोगों से हाथ जोड़कर शांत रहने का आग्रह करते रहे। भाषण देते हुए राहुल गांधी को भी लोगों को शांत रहने का आग्रह करना पड़ा, लेकिन उनकी अपील का कोई असर नहीं हुआ। राहुल और गहलोत जब एक गाड़ी में सवार होकर नागौर जिले के मकराना की सभा के लिए रवाना होने लगे तो लोगों ने जबरदस्त नारेबाजी की। पुलिसकर्मी भीड़ को उनकी गाड़ी तक बढ़ने से रोकते रहे। रूपनगढ़ में पायलट की गाड़ी को राहुल गांधी के काफिले में शामिल होने से रोके जाने को लेकर भी उनके समर्थकों ने नाराजगी जताई।राहुल गांधी के पहले दिन हनुमानगढ़ जिले में हुई सभा में भी पायलट को बोलने का मौका नहीं दिया गया था। पायलट समर्थक विधायकों व नेताओं ने दौरे में राहुल गांधी के साथ मौजूद पार्टी के संगठन महासचिव के.सी.वेणुगोपाल से की। राहुल गांधी का दो दिवसीय दौरा तो 12 व 13 फरवरी को खत्म हो गया, लेकिन गहलोत व पायलट खेमों के बीच खींचतान पहले के बजाय बढ़ गई। दोनों के समर्थकों ने अब खुलकर मैदान में उतरने का मानस बना लिया। राहुल गांधी के दौरे में खुद की उपेक्षा से नाराज पायलट अब 17 फरवरी को जयपुर जिले के कोटखावदा में होने वाली किसान महापंचायत में अधिक से अधिक भीड़ जुटाने में जुटे हैं। पायलट अब तक प्रदेश में दो किसान महापंचायत कर चुके हैं। गहलोत खेमा इससे नाराज है। पायलट खेमे के विधायक विधानसभा में अपनी ही सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हें। वे अब पार्टी के भीतर खुद को मजबूत करने को लेकर नई रणनीति बनाने में जुटे हैं

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